क्या लोकसभा के साथ देशभर में विधानसभा चुनाव होंगे? मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा- कोई चांस नहीं

uploaded on : 2018-08-23

औरंगाबाद // चुनाव आयोग ने 10 दिन में दूसरी बार एक राष्ट्र-एक चुनाव की संभावनाओं को खारिज कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने औरंगाबाद में गुरुवार को एक सवाल के जवाब में कहा- देशभर में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराने का कोई चांस नहीं है। इससे पहले 14 अगस्त को रावत ने कहा था कि कानून में बदलाव किए बिना देश में एक साथ चुनाव कराना संभव नहीं है।
रावत ने एक देश-एक चुनाव के लिए कानून बनाने की बात दोहराते हुए कहा कि इसके लिए कम से कम 1 साल का वक्त लगेगा। आम चुनाव के 14 महीने पहले से चुनाव आयोग तैयारी शुरू कर देता है। हमारे पास सिर्फ 400 कर्मचारी हैं। जबकि हमें चुनाव के दौरान 1.11 करोड़ कर्मचारी तैनात करने होते हैं।" वहीं, ईवीएम में खराबी के सवाल पर रावत ने कहा, "देशभर में ईवीएम से जुड़ी शिकायतों का प्रतिशत 0.5-0.6% है। जो सामान्य है।"
 
मीडिया रिपोर्ट पर देने पड़ी थी सफाई:  हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अप्रैल-मई 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम के विधानसभा चुनाव भी हो सकते हैं। इसके बाद चुनाव आयोग को ये सफाई पेश करनी पड़ी थी। रावत ने कहा था, "कई चरणों में यह संभव है। जैसे 11 राज्यों के चुनाव आम चुनाव के साथ कराए जाएं तो किस्तों में ऐसा हो सकता है, बशर्ते जनप्रतिनिधि इसके लिए अपने राज्यों की विधानसभा को भंग करने पर सहमत हो जाएं।" मिजोरम विधानसभा का कार्यकाल 15 दिसंबर को खत्म हो होना है। वहीं, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के कार्यकाल जनवरी-2019 में खत्म हो रहे हैं।  
 
 
 
मौजूदा समय में एकसाथ चुनाव संभव नहीं :  इससे पहले रावत ने कहा था, "चुनावों के संचालन के लिए 100 फीसदी वीवीपैट की उपलब्धता भी जरूरी है। इस मसले पर चुनाव आयोग ने खुद 2015 में सुझाव दिए थे। इसके लिए अतिरिक्त पुलिस बल और चुनाव अधिकारियों की भी जरूरत पड़ेगी। लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को 24 लाख ईवीएम की जरूरत होगी। यह संख्या आम चुनाव में लगने वाली ईवीएम से दोगुनी ज्यादा है।"
 
 
 
दो साल में इन राज्यों में होने हैं चुनाव
 
2018 राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम, मध्यप्रदेश
2019
 
 
लोकसभा चुनाव,ओडिशा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, सिक्किम, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र
 
 
 
 
भाजपा एक राष्ट्र- एक चुनाव पर दे रही है जोर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आने के बाद से ही हमेशा एक राष्ट्र-एक चुनाव के मुद्दे पर जोर दे रहे हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी इसे लागू करने पर समर्थन दे चुके हैं। इस पर चर्चा के लिए कमीशन ने जुलाई में राजनीतिक पार्टियों की बैठक बुलाई थी। इसमें एनडीए के दो सहयोगी समेत 5 दलों ने प्रस्ताव का समर्थन किया था। 9 दल इसके विरोध में थे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इसी महीने 'एक देश-एक चुनाव' के समर्थन में लॉ कमीशन को चिट्ठी भी लिखी थी।