सुप्रीम कोर्ट के भविष्य पर चर्चा के लिए फुल कोर्ट बुलाएं: सीनियर जजों का चीफ जस्टिस को खत

uploaded on : 2018-04-25 19:52:20

नई दिल्ली // दो सीनियर जजों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा को खत लिखकर सुप्रीम कोर्ट के भविष्य पर चर्चा के लिए फुल कोर्ट बुलाने की मांग की है। सूत्रों के मुताबिक, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर ने ये चिट्ठी 22 अप्रैल को लिखी है। राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस खारिज होने के एक दिन पहले ये चिट्ठी लिखी गई। इसमें कहा गया कि संस्थान की समस्याओं और इसके भविष्य पर चर्चा के लिए फुल कोर्ट बुलाई जाए। संविधान के मुताबिक, फुल कोर्ट मीटिंग में सुप्रीम कोर्ट के सभी जज शामिल रहते हैं।

चिट्ठी की वजह से 15 तक चली थी सुबह की बैठक
- ऐसा माना जाता है कि जो मसले चिट्ठी में उठाए गए थे, वे सोमवार को सुबह की चाय बैठक के दौरान भी उठे थे। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट के सभी जज शामिल थे। इस मीटिंग के चलते कोर्ट की कार्यवाही 15 मिनट देरी से शुरू हुई थी। आमतौर पर ये बैठक 5 मिनट की होती है। 
- यही मसले सबसे पहले जस्टिस जे चेलमेश्वर ने 21 मार्च को उठाए थे और फुल कोर्ट बुलाने की मांग की थी। 9 अप्रैल को जस्टिस कुरियन जोसेफ ने उन मसलों को देखने के लिए 7 वरिष्ठ जजों की बेंच बनाने और उन मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही गई थी, जो सुप्रीम कोर्ट को परेशान कर रहे हैं।

क्या होती है फुल कोर्ट?

- सामान्यतौर पर फुल कोर्ट तब बुलाई जाती है, जब न्यायपालिका से जुड़े जनहित के किसी मसले पर चर्चा करनी होती है।

महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस खारिज करने के तुरंत बाद हुई मीटिंग
- सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सोमवार को जैसे ही महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस खारिज किया, उसके तुरंत बाद सुप्रीम कोर्ट में सुबह की बैठक बुलाई गई। सीजेआई ने बैठक के नतीजे खासतौर से फुल कोर्ट के बारे में कुछ भी नहीं किया। उधर, जस्टिस गोगोई और जस्टिस लोकुर इस पक्ष में थे कि महाभियोग का मसला पीछे छोड़कर उन मुद्दों पर जजों की चर्चा कराई जाए, जो सुप्रीम कोर्ट को परेशान कर रहे हैं।

जस्टिस चेलमेश्वर ने भी की थी फुल कोर्ट बुलाने की मांग
- सुप्रीम कोर्ट में केसों के बंटवारे और बेंच तय करने को लेकर दायर दूसरी याचिका पर जस्टिस जे चेलमेश्वर ने सुनवाई से इनकार कर दिया था। जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा था कि मैं नहीं चाहता कि मेरा आदेश 24 घंटे में पलट दिया जाए।
- 21 मार्च को जस्टिस चेलमेश्वर ने सीजेआई को 6 पन्नों का खत लिखा था। इसमें उन्होंने न्यायपालिका में सरकार के कथित दखल पर नाराजगी जताई और इस मुद्दे पर ध्यान देने के लिए उन्होंने फुल कोर्ट बुलाने की बात कही थी। लेटर की कॉपी सुप्रीम कोर्ट के सभी 22 न्यायाधीशों को भेजी गई थी।

पहली बार सुप्रीम कोर्ट के 4 सीनियर जजों ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस
- देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जज इसी साल 12 जनवरी को एक साथ मीडिया के सामने आए। 20 मिनट तक चली इस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन भीमराव लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ मौजूद थे। 
- इन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का एडमिनिस्ट्रेशन ठीक से काम नहीं कर रहा है और चीफ जस्टिस की ओर से ज्युडिशियल बेंचों को सुनवाई के लिए केस मनमाने ढंग से दिए जा रहे हैं। इससे ज्युडिशियरी के भरोसे पर दाग लग रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इंस्टीट्यूशन को ठीक नहीं किया गया तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।

कांग्रेस ने दिया था महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस
- बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति एम वेंकैया नायडू ने सोमवार को खारिज कर दिया था। महाभियोग प्रस्ताव लाने का नोटिस कांग्रेस की अगुआई में सात दलों ने दिया था। इस पर 64 सांसदों के दस्तखत थे।