यहां है महात्मा गांधी का अनासक्ति आश्रम, किए थे हिमालय के दर्शन

uploaded on : 2017-10-03 09:43:11

2 अक्तूबर को भारत देश महात्मा गांधी की 147वीं जयंती मना रहा है। दुनिया भर में अहिंसा के पैरोकार रहे गांधी भारत को आजादी दिलाने में बेहद अहम भूमिका निभाई, लेकिन को कभी भी राजनीति में अहम पद लेने के लिए आगे नहीं आए। महात्मा गांधी ने अहिंसा के साथ साथ संयम, ब्रह्मचर्य की भी मिसाल थे। इतना ही नहीं उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कितनाब ''अनासक्ति योग'' की रचना भी यहीं पूरी की थी।
गांधी सबसे पहले इस स्थान पर 1929 में पहुंचे। वो भारत का दौरा कर रहे थे और जब वो उत्तराखंड के कौसानी से निकले तो थकान मिटाने के लिए यहां एक चाय बागान के मालिक की प्रार्थना पर उसके अतिथि ग्रह में दो दिन के लिए रुक गए।
सुबह सुबह जब गांधी इस अतिथि ग्रह में योग करने बाहर आए तो उन्हें साक्षात हिमालय के दर्शन हुए और वो मंत्रमुग्ध रह गए। वो इस जगह की खूबसूरती और यहां के वातावरण में भरे आध्यात्म से इतना प्रभावित हुए कि वो दो की बजाय पूरे 14 दिन तक यहां रहे औऱ ''अनासक्ति योग'' पुस्तक को भी पूरा कर डाला।
गांधी इस जगह से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसे भारत का स्विटजरलैंड कहा और ये भी कहा कि साक्षात हिमालय दर्शन करवाने के कारण यह जगह हमेशा पवित्र रहेगी।
इसके बाद गांधी जब तब इस जगह पर आते रहे। गांधी की विश्राम स्थली के रूप में चर्चित होने से पहले यह जगह ग्राम पंचायत का डाक बंगला था। लेकिन आजादी के बाद उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी ने इस डाक बंगले को उत्तर प्रदेश महात्मा गांधी जी की स्मारक निधि को सौंप दिया। स्मारक निधि ने इसे गांधी की विश्राम स्थली के रूप में चिह्नित करते हुए इसे गांधी अनासक्ति आश्रम का नाम दिया।
आश्रम में गांधी जी के जीवन से जुड़ी यादें, चीजें, किताबों और तस्वीरों का संग्रह है। यहां छोटा सा प्रार्थनास्थल है जहां गांधी दर्शन के साथ साथ रोज सुबह शाम प्रार्थना सभा भी होती है।
यहां परिसर में ही एक ऊंचा सा स्टॉप है जिसके ऊपर खड़े होकर गांधी सुबह सुबह हिमालय दर्शन किया करते थे। यहां गांधी जी के तीन बंदरों की भी मूर्तियां हैं और आस पास बेहद शांत और सौम्य वातावरण में घिरे चाय बागान हैं।
आश्रम के बाहर पार्किंग की जगह पर एक बड़ा सा बोर्ड लगा है जिस पर गांधी के पूरे परिवार की जानकारी मौजूद है। इसमे गांधी के परदादा से लेकर गांधी के पोतो तक की संपूर्ण जानकारी है।
गांधी जीवन दर्शन की चाह रखने वालों के लिए यहां रुकने की भी व्यवस्था है।
आमतौर पर यहां पर्यटक सुबह सुबह चार बजे ही पहुंच जाते हैं ताकि वो यहां से बर्फ से ढके हिमालय के दर्शन कर सकें। सर्दियों की अपेक्षा यहां मई से सितंबर तक पर्यटकों की आवाजाही ज्यादा रहती है।