इस शख्स की वजह से महात्मा गांधी बने अहिंसावादी

uploaded on : 2017-10-03 09:35:13

2 अक्तूबर यानी गांधी जयंती भारत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। गांधी जी के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम में उनके सहयोग, अंहिसा पर उनके वचन, इन सभी के बारे में लगभग सभी लोग जानते हैं। इतिहास में भी उनके बारे में काफी कुछ दर्ज है, लेकिन आज हम आपको उनके जीवन की एक ऐसी सच्चाई बताने जा रहे हैं, जो शायद ही आप जानते होंगे।
महात्मा गांधी...एक ऐसी शख्सियत जिसने भारत को आजाद कराने के लिए अपना पूरा जीवन दांव पर लगा दिया। गांधी अहिंसावादी थे और देश को को भी अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए उन्होंने अहिंसा का ही रास्ता चुना। हालांकि गलत काम के खिलाफ वो अपनी आवाज भी उठाते थे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गांधी शुरुआत से ही अहिंसावादी नहीं थे और अन्याय के विरुद्ध भी अपनी आवाज नहीं उठाते थे ?
ये जानकर थोड़ा अटपटा जरूर लगे, लेकिन ये सच है। गांधी को ये दो गुण एक खास शख्स से मिले, जिसकी उनकी जिंदगी में भी काफी अहम भूमिका रही। ये दोनों गुण गांधी जी को अपनी पत्नी कस्तूरबा गांधी से मिले।
दरअसल महात्मा गांधी की शादी बचपन में ही कस्तूरबा गांधी से कर दी गई थी। उस 13 साल की छोटी सी उम्र में दोनों में ही कुछ खास समझ नहीं थी, लेकिन वो एक आजाद ख्याल की लड़की थीं। शादी के बाद गांधी जी चाहते थे कि वो कस्तूरबा को अपने नियंत्रण में रखें, लेकिन कस्तूरबा कहां उनके वश में आने वाली थीं। उन्हें कुछ भी गलत बर्दाश्त नहीं होता था। शायद यही वजह थी कि वो गांधी जी की हर बात का जवाब भी नहीं देती थीं। इसका जिक्र एक वेबसाइट ने भी पिछले साल अपने एक लेख में किया था।
कस्तूरबा गांधी को अगर कुछ गलत होते हुए दिखता तो वो चुप नहीं बैठती थीं और डटकर उस गलत या अन्याय का मुकाबला करती थीं और इस तरह अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का ये जो गुण है वो गांधी जी को कस्तूरबा से मिला।
कस्तूरबा और गांधी जी लगभग एक ही उम्र के थे इसलिए दोनों के बीच लड़ाई-झगड़े भी खूब होते थे, हालांकि मान-मुनव्वल हो जाता था। कम उम्र में शादी होने के चलते कस्तूरबा पढ़ नहीं पाईं और गांधी जी को इसका बहुत मलाल था। उन्हें बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था कि उनकी बीवी को कोई अनपढ़ कहे। इसलिए उन्होंने कस्तूरबा को पढ़ाने की कोशिश की, लेकिन समय की कमी होने की वजह से वो ऐसा नहीं कर पाए।
कस्तूरबा के साथ कई बार गांधी जी का व्यवहार कई बार प्रेम भरा नहीं रहा और इसका जिक्र खुद उन्होंने एक बार किया भी था, जिसका उल्लेख satyagrah.scroll.in में एक लेख में भी किया गया था। इसके मुताबिक, कस्तूरबा के साथ अपने उस वक्त के व्यवहार के बारे में गांधी जी ने लिखा था, 'मैं तो जितना प्रेमी उतना ही क्रूर पति था। मैं खुद को उसका शिक्षक भी मानता था और इस कारण अपने अंधे प्रेम के वश में होकर उसे खूब सताता था।'
लाख लड़ाइयों और अपनी कमजोरियों के बाद भी कस्तूरबा गांधी की जिंदगी में एक मजबूत स्तंभ बनकर खड़ी रहीं। वही एक महिला थीं जिसने मोहनदास करमचंद गांधी को 'महात्मा' बनते हुए देखा था और वो भी करीब से।